Bhai Dooj 2021 – भैया दूज के बारे में जानें

Bhai-Dooj-2021
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Bhai Dooj 2021

Bhai Dooj 2021- यह त्यौहार कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया को मनाया जाता है। यह भाई बहन के प्रेम का प्रतीक है। इस दिन भाई-बहन को साथ-साथ यमुना स्नान करना ,तिलक लगवाना तथा बहिन के घर भोजन करना अति फलदायी होता है। इस दिन बहन भाई की पूजा कर उसके दीर्घायु तथा अपने सुहाग की हाथ जोड़ यमराज से प्रार्थना करती है। इसी दिन सूर्य तनया जमुना जी ने अपने भाई यमराज को भोजन कराया था। इसलिए इसे ‘यम द्वितीया’ भी कहते हैं । इस दिन श्रध्दावनत भाई को स्वर्ण, वस्त्र, मुद्रा आदि बहन को देना चाहिए।

भाई दूज 2021 मुहूर्त

कब है : भाईदूज का त्योहार 6 नंबर 2021 शनिवार को मनाया जाएगा।

शुभ समय : 1 बजकर 10 मिनट 12 सेकंड से प्रारंभ होकर 03 बजकर 21 मिनट से 29 सेकंड तक रहेगा।

शुभ मुहूर्त :
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:19 से दोपहर 12:04 तक।
विजय मुहूर्त- दोपहर 01:32 से 02:17 तक।
अमृत काल मुहूर्त- दोपहर 02:26 से 03:51 तक।
गोधूलि मुहूर्त- शाम 05:03 से 05:27 तक।
सायाह्न संध्या मुहूर्त- शाम 05:14 से 06:32 तक।
निशिता मुहूर्त- रात्रि 11:16 से 12:08 तक।

भाई दूज पूजा सामग्री

सनातन हिंदु धर्म में रक्षाबंधन की तरह ही भाईदूज का भी विशेष महत्व होता है। इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाती हैं। इस दिन भाई की लंबी उम्र और उज्जवल भविष्य के लिए पहले पूजा की थाली, फल, फूल, दीपक, अक्षत, मिठाई, सुपारी आदि चीजों से सजाना लें। इसके बाद घी का दीपक जलाकर भाई की आरती करें और शुभ मुहूर्त देखकर तिलक लगाएं। तिलक लगाने के बाद भाई को पान, मिठाई आदि चीज खिलाएं।

भाई दूज की पूजा

  1. इस दिन बहनें अपने भाई को घर बुलाकर तिलक लगाकर उन्हें भोजन कराती हैं।
  2. इस दिन बहनें प्रात: स्नान कर, अपने ईष्ट देव और विष्णु एवं गणेशजी का व्रत-पूजन करें।
  3. फिर चावल के आटे से चौक तैयार करने के बाद इस चौक पर भाई को बैठाएं और उनके हाथों की पूजा करें।
  4. फिर भाई की हथेली पर चावल का घोल लगाएं, उसके ऊपर थोड़ा सा सिन्दूर लगाकर कद्दू के फूल, सुपारी, मुद्रा आदि हाथों पर रखकर धीरे-धीरे हाथों पर पानी छोड़ें। फिर हाथों में कलवा बांधे।
  5. कहीं-कहीं पर इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारती हैं और फिर कलाइयों में कलावा बांधती हैं। इसके बाद माखन-मिश्री से भाई का मुंह मीठा करें। फिर भोजन कराएं।
  6. कलावा बांधने के बाद अब शुभ मुहूर्त में तिलक लगाएं और आरती उतारें। उपरोक्त सभी सामग्री से भाई की पूजा करें और फिर आरती उतारें।
  7. तिलक की रस्म के बाद बहनें भाई को भोजन कराएं और उसके बाद उसे पान खिलाएं। भाई दूज पर भाई को भोजन के बाद पान खिलाने का ज्यादा महत्व माना जाता है। मान्यता है कि पान भेंट करने से बहनों का सौभाग्य अखण्ड रहता है।
  8. तिलक और आरती के बाद भाई अपनी बहनों को उपहार भेंट करें और सदैव उनकी रक्षा का वचन दें।
  9. भाईदूज पर यम और यमुना की कथा सुनने का प्रचलन है।
  10. अंत में संध्या के समय बहनें यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर दीये का मुख दक्षिण दिशा की ओर करके रखें।

भैया दूज की कहानी

सूर्य भगवान की स्त्री का नाम संज्ञा देवी था । इनकी दो सन्तानें, पुत्र यमराज तथा कन्या यमुना थी। संज्ञा रानी पति सूर्य की उद्दिप्त किरणों को न सह सकने के कारण उत्तरी ध्रुव प्रदेश में छाया बनकर रहने लगी । उसी छाया से ताप्ती नदी तथा शनिश्चर का जन्म हुआ इसी छाया से अश्विनी कुमारों का भी जन्म बतलाया जाता हैं, जो देवताओं के वैध माने जाते हैं।

इधर छाया का यम तथा यमुना से विमाता का व्यवहार होने लगा। इससे खिन्न होकर यम ने अपनी एक नई नगरी यमपुरी बसाई, यमपुरी में पापियों को दण्ड देने कार्य सम्पादित करते भाई को देखकर यमुना जी गो लोक चली आई जो कि कृष्णावतार के समय भी थी।

बहुत समय व्यतीत हो जाने पर एक दिन सहसा यम को अपनी बहन की याद आई । उन्होंने दूतो को भेजकर यमुना को बहुत खोजवाया, मगर मिल न सकी। फिर यमराज स्वयं ही गौ लोक गये जहाँ विश्राम घाट पर यमुना जी से भेंट हुई।

भाई को देखते ही यमुना हर्ष विभोर हो स्वागत सत्कार तथा भोजन करवाया । इससे प्रसन हो यम ने वर मांगने को कहा-यमुना ने कहा-हे भईया! मैं आपसे यह वरदान मांगना चाहती हूं कि मेरे जल में स्नान करने वाले नर-नारी यमपुरी न जाएं। प्रशन बड़ा कठिन था, यम के ऐसा वर देने से यमपुरी का अस्तित्व ही समाप्त हो जाता।

भाई को असमंजस में देखकर यमुना बोली-आप चिन्ता न करे मुझे यह वरदान दे कि जो लोग आज के दिन बहन के यहां भोजन करके, इस मथुरा विश्राम घाट पर स्नान करें वह तुम्हारे लोक को न जाएं?

इसे यमराज ने स्वीकार कर लिया।

इस तिथि को जो सज्जन बहन के घर भोजन नही करेंगे उन्हें मै बांधकर यमपुरी ले जाऊंगा और तुम्हारे जल में स्नान करने वालों को स्वर्ग प्राप्त होगा। तभी से यह त्यौहार मनाया जाता हैं।

भाई दूज का महत्व

भाई दूज के दिन ही यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे, इसके बाद से ही भाई दूज या यम द्वितीया की परंपरा की शुरुआत हुई। भाई दूज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण नरकासुर राक्षस का वध करके द्वारिका लौटे थे और तब बहन सुभद्रा ने उन्हें विजयी तिलक लगाकर उका फल, फूल, मिठाई और अनेकों दीये जलाकर स्वागत किया था। साथ ही उनकी दीर्घायु की कामना की थी।

Bhai Dooj 2021

इसीलिए इस दिन यम देवता और श्रीकृष्ण की पूजा करने का महत्व है। भाई दूज का पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और स्नेह का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु और सुख समृद्धि की कामना करती है। वहीं भाई शगुन के रूप में बहन को उपहार देता है।

मान्यता है कि इस दिन बहनें आसमान में उड़ती हुई चील देखकर अपने भाईयों की लंबी आयु के लिए जो प्रार्थना करती हैं, वह पूर्ण हो जाती है और साथ ही वह अखंड सौभाग्यवती रहती हैं। इसके साथ ही इस दिन भाई और बहन यमुना नदी में स्नान कर इसके तट पर यम और यमुना का पूजन करते हैं जिससे दोनों ही अकाल मृत्यु से छुटकारा पाकर सुखपूर्वक जीवनयापन करते हैं।